आमतौर पर पुरुषों की नाभि बाईं ओर तथा स्त्रियों की नाभि दाईं ओर टला करती है।।
पहचान
ऊपर की तरफ
नीचे की तरफ
बाईं ओर
दाहिनी ओर
पहचान
लेटकर नाभि को दबाकर महसूस करें तो छोटी सी गेंद जैसी कोई चीज़ धड़कती महसूस होती है,यदि ये धड़कन ठीक नाभि के नीचे हो तो सही मानी जाती है। यदि इधर उधर हो तो कब्ज़, दस्त की शिकायत होती है। नाभि हमारे शारीर की ७२०० नाड़ियों का संगम है, इसी कारण सारा शरीर प्रभावित होता है ,धरण ठीक करने के सैकड़ों तरीके सदियों से प्रभावी रूप में प्रचलित हैं। जिनमें से सबसे आसन तरीका बता रहे हैं। जो तुरंत परिणाम देता है। धरण जांचने का तरीका ये है की अपने दोनों हाथों की रेखाए मिला कर छोटी उंगली की लम्बाई चैक करे, अंतर दिखने पर धरण की पुष्टि होती है,
तब पीठ के बल लेट जाएँ,दोनों पैरों को ९० डिगरी एंगल पर जोड़ें, आप देखेंगे की एक पैर छोटा है, एक बड़ा है.ये टली नाभि जांचने के तरीकें हैं....
तब पीठ के बल लेट जाएँ,दोनों पैरों को ९० डिगरी एंगल पर जोड़ें, आप देखेंगे की एक पैर छोटा है, एक बड़ा है.ये टली नाभि जांचने के तरीकें हैं....
ऊपर की तरफ
यदि नाभि का स्पंदन ऊपर की तरफ चल रहा है याने छाती की तरफ तो यकृत प्लीहा आमाशय अग्नाशय की क्रिया हीनता होने लगती है ! इससे फेफड़ों-ह्रदय पर गलत प्रभाव होता है। मधुमेह, अस्थमा,ब्रोंकाइटिस -थायराइड मोटापा -वायु विकार घबराहट जैसी बीमारियाँ होने लगती हैं ।
नीचे की तरफ
यही नाभि मध्यमा स्तर से खिसककर नीचे अधो अंगों की तरफ चली जाए तो मलाशय-मूत्राशय -गर्भाशय आदि अंगों की क्रिया विकृत हो अतिसार-प्रमेह प्रदर -दुबलापन जैसे कई कष्ट साध्य रोग हो जाते है। फैलोपियन ट्यूब नहीं खुलती और इस कारण स्त्रियाँ गर्भधारण नहीं कर सकतीं। स्त्रियों के उपचार में नाभि को मध्यमा स्तर पर लाया जाये। इससे कई वंध्या स्त्रियाँ भी गर्भधारण योग्य हो जाती है ।
बाईं ओर
बाईं ओर खिसकने से सर्दी-जुकाम, खाँसी,कफजनित रोग जल्दी-जल्दी होते हैं ।
दाहिनी ओर
दाहिनी तरफ हटने पर अग्नाशय -यकृत -प्लीहा क्रिया हीनता -पैत्तिक विकार श्लेष्म कला प्रदाह -क्षोभ -जलन छाले एसिडिटी (अम्लपित्त) अपच अफारा हो सकती है ।
उपचार
नाभि टलने पर क्या करे ।
व्यक्ति को हल्का सुपाच्य पथ्य देना चाहिए ।
व्यक्ति को मूँगदाल की खिचड़ी के सिवाय कुछ न दें।
दिन में एक-दो बार अदरक का 2 से 5 मिलिलीटर रस बराबर शहद मिलाकर पिलाने से लाभ होता है ।
समाधान
ज़मीन पर दरी या कम्बल बिछा ले। अभी बच्चो के खेलने वाली प्लास्टिक की गेंद ले लीजिये। अब उल्टा लेट जाए और इस गेंद को नाभि के मध्य रख लीजिये। पांच मिनट तक ऐसे ही लेटे रहे। खिसकी हुई नाभि (धरण) सही होगी। फिर धीरे से करवट ले कर उठ जाए, और ओकडू बैठ जाए और एक आंवला का मुरब्बा खा लीजिये या फिर 2 आटे के बिस्कुट खा लीजिये। फिर धीरे धीरे खड़े हो जाए।।
कमर के बल लेट जाएं और पादांगुष्ठनासास्पर्शासन कर लें। इसके लिए लेटकर बाएं पैर को घुटने से मोड़कर हाथों से पैर को पकड़ लें व पैर को खींचकर मुंह तक लाएं। सिर उठा लें व पैर का अंगूठा नाक से लगाने का प्रयास करें। जैसे छोटा बच्चा अपना पैर का अंगूठा मुंह में डालता है। कुछ देर इस आसन में रुकें फिर दूसरे पैर से भी यही करें। फिर दोनों पैरों से एक साथ यही अभ्यास कर लें। 3-3 बार करने के बाद नाभि सेट हो जाएगी।।
सीधा (चित्त) सुलाकर उसकी नाभि के चारों ओर सूखे आँवले का आटा बनाकर उसमें अदरक का रस मिलाकर बाँध दें एवं उसे दो घण्टे चित्त ही सुलाकर रखें। दिन में दो बार यह प्रयोग करने से नाभि अपने स्थान पर आ जाती हैं।।
नाभि सेट करके पाँव के अंगूठों में चांदी की कड़ी भी पहनाई जाती हैं, जिस से भविष्य में नाभि टलने का खतरा कम हो जाता हैं। अक्सर पुराने बुजुर्ग लोग धागा भी बाँध देते हैं।
नाभि के टलने पर और दर्द होने पर 20 ग्राम सोंफ, गुड समभाग के साथ मिलाकर प्रात: खाली पेट खायें। अपने स्थान से हटी हुई नाभि ठीक होगी। और भविष्य में नाभि टलने की समस्या नहीं होगी।।
व्यायाम
पुष्टि होने पर इसे ठीक करने के लिए, छोटे पैर की टांग को धीरे-२ ऊपर उठायें ६,७,८,९, इंच तक उठायें, फिर धीरे-२ ही नीचे रखकर लम्बा सांस लें ,यही क्रिया दो बार और करें, ये क्रिया सुबह शाम ख़ाली पेट करनी चाहिए।पैरों को फिर मिलाकर देखें दोनों अंगूठे बराबर दिखेंगे यानी आपकी नाभि सही जगह पर बैठ गयी है। फिर उठकर २० ग्राम गुड, २० ग्राम सौफ का बनाया चूरन फांक लें पानी से इससे पुरानी से पुरानी धरण आप खुद महिना दो महीने में ठीक कर सकतें है पेट को कभी भी मसल वाना नहीं चाहिए।
व्यायाम
पुष्टि होने पर इसे ठीक करने के लिए, छोटे पैर की टांग को धीरे-२ ऊपर उठायें ६,७,८,९, इंच तक उठायें, फिर धीरे-२ ही नीचे रखकर लम्बा सांस लें ,यही क्रिया दो बार और करें, ये क्रिया सुबह शाम ख़ाली पेट करनी चाहिए।पैरों को फिर मिलाकर देखें दोनों अंगूठे बराबर दिखेंगे यानी आपकी नाभि सही जगह पर बैठ गयी है। फिर उठकर २० ग्राम गुड, २० ग्राम सौफ का बनाया चूरन फांक लें पानी से इससे पुरानी से पुरानी धरण आप खुद महिना दो महीने में ठीक कर सकतें है पेट को कभी भी मसल वाना नहीं चाहिए।