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Tuesday, February 28, 2017

हिस्टीरिया का प्राकृतिक चिकित्सा द्वारा उपचार


  • किसी स्त्री में हिस्टीरिया रोग के लक्षण नज़र आते ही उसे तुरन्त किसी मनोचिकित्सक से इस रोग का इलाज कराना चाहिए।
  • हिस्टीरिया के रोगी को गुस्से में या किसी और कारण से मारना नहीं चाहिए क्योंकि इससे उसे और ज़्यादा मानसिक और शारीरिक कष्ट हो सकते हैं।
  • एक बात का ख़ासतौर पर ध्यान रखना चाहिए कि हिस्टीरिया रोगी अपने आपको किसी तरह का नुकसान ना पहुंचा पाए।
  • इस रोग के रोगी की सबसे अच्छी चिकित्सा उसकी इच्छाओं को पूरा करना तथा उसे संतुष्टि देना है। इसके अलावा रोगी को शांत वातावरण में घूमना चाहिए। रोगी के सामने ऐसी कोई बात न करनी चाहिए जिससें उसे चिन्ता सतायें।
  • इस रोग से पीड़ित स्त्रियों को जब दौरा पड़ता है तो उसके शरीर के सारे कपड़े ढीले कर देने चाहिए तथा उसे खुली जगह पर लिटाना चाहिए और उसके हाथ और तलवों को मसलना चाहिए।
  • जब इस रोग से पीड़ित रोगी बेहोश हो जाए तो उसके अंगूठे के नाखून में अपने नाखून को चुभोकर उसकी बेहोशी को दूर करना चाहिए और फिर उसके चेहरे पर ठंडे पानी के छींटे मारनी चाहिए। इससे रोगी स्त्री को होश आ जाता है और उसका बेहोशीपन दूर हो जाता है।
  • जब रोगी स्त्री बेहोश हो जाती है तो हींग तथा प्याज को काटकर सुंघाने से लाभ मिलता है।
  • बेहोश होने वाली स्त्री को होश में लाने के लिए सबसे पहले रोगी की नाक में नमक मिला हुआ पानी डाल दें। इससे बेहोशी रोग ठीक हो जाएगा, लेकिन यह उपाय शीघ्र ही और कुछ ही समय के लिए है। इसका अच्छी तरह से इलाज तो अपने डाक्टर या अपने वैद्ध से ही कराना चाहिए।
  • इस रोग से पीड़ित स्त्री का इलाज करने के लिए कुछ दिनों तक उसे फल तथा बिना पका हुए भोजन खिलाना चाहिए।
  • इस रोग से पीड़ित रोगी के लिए जामुन का सेवन बहुत ही लाभदायक होता है। इसलिए रोगी स्त्री को प्रतिदिन जामुन खिलाना चाहिए। यदि इस रोग से पीड़ित स्त्री प्रतिदिन 1 चम्मच शहद को सुबह-दोपहर-शाम चाटे तो उसका यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।
  • केसर, कज्जली, बहेड़ा, कस्तूरी, छोटी इलायची, जायफल और लौंग को बराबर मात्रा में मिलाकर 7 दिन तक सौंफ के काढ़े में मिलाकर और घोटकर तैयार कर लें। इसके बाद इस मिश्रण को तैयार करके इलायची के दाने के बराबर की गोलियां बना लें। 4-4 ग्राम मूसली सफेद तथा सौंफ के काढ़े से सुबह और शाम सेवन करना चाहिए। अगर मासिकस्राव के समय में कोई कमी हो तो सबसे पहले ऊपर बताई गई दवा से इलाज करें।
  • हिस्टीरिया रोग के होने पर रोगी स्त्री को लगभग एक ग्राम के चौथाई भाग के बराबर लोह भस्म को एक चम्मच के बराबर शहद में मिलाकर सुबह और शाम के समय में चटा दें और फिर ऊपर से 10-12 ग्राम मक्खन तथा मलाई के साथ खिला दें। इसके साथ दाल, रोटी, दूध, मलाई, घी का इस्तेमाल कर सकते हैं।
  • हिस्टीरिया की रोगी स्त्री को कुछ दिन के लिए किसी ठण्डे स्थान पर ले जाना अच्छा होता है।हिस्टीरिया रोग अक्सर ज़्यादा पेशाब करने से ही कम हो जाता है इसलिए इस रोग की स्त्री को बार-बार पेशाब कराने की कोशिश कराते रहना चाहिए।
  • इस रोग से पीड़ित रोगी को सकारात्मक सोच रखनी चाहिए तभी यह रोग पूरी तरह से ठीक हो सकता है।
  • इस रोग को ठीक करने के लिए स्त्रियों को योगनिद्रा का अभ्यास करना चाहिए।हिस्टीरिया रोग को ठीक करने के लिए स्त्रियो को प्रतिदिन ठंडे पानी से स्नान करना चाहिए तथा इसके बाद वायु स्नान और फिर धूपस्नान (धूप में शरीर की सिंकाई करना) करना चाहिए।
  • हिस्टीरिया रोग को ठीक करने के लिए कई प्रकार के आसन है जिनको प्रतिदिन करने से यह रोग कुछ दिनों में ही ठीक हो जाता है। ये आसन इस प्रकार हैं- ताड़ासन, गर्भासन, उत्तानपादासन गोरक्षासन, कोनासन, भुंगगासन, शवासन, पद्मासन, सिंहासन तथा वज्रासन आदि।