यह पित्त सम्पूर्ण शरीर की त्वचा में रहता है। भ्राजक पित्त हमारे शरीर में विभिन्न कार्य करता है जैसे कि त्वचा को कान्तिमान बनाना, शरीर को सौन्दर्य प्रदान करना, विटामिन डी को ग्रहण करना तथा वायुमण्डल में पाए जाने वाले रोगाणुओं से शरीर की रक्षा करना।
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- अजवाइन | Celery
- काली मिर्च | Black Pepper
- खाने का सोडा | baking soda
- गेहूं | Wheat
- जीरा | Cumin
- टमाटर | Tomato
- धनिया | Coriander
- नमक | Salt
- नीबू | Lemon
- पुदीना | Peppermint
- सिरका | Vinegar
- सोंठ | Dry Ginger
- हींग | Asafoetida
- हल्दी | Turmeric
Friday, March 10, 2017
Thursday, March 09, 2017
घरेलू ठंडा (Soft Drink)
गर्मी में डिहाइड्रेशन से बचने के लिए कोल्ड ड्रिंक या सोडा पीने के बजाय नेचुरल चीजों से बने ड्रिंक्स पीने की सलाह डॉक्टर्स भी देते हैं। इसमें डाले जाने वाले अलग-अलग मसालों से न सिर्फ टेस्ट बढ़ता है, बल्कि हेल्थ के लिए भी यह फायदेमंद है। हम बता रहे हैं ऐसे ही 11 देसी ड्रिंक्स के बारे में।
Wednesday, March 08, 2017
आलोचक पित्त
यह पित्त आंखों में रहता है। देखने की क्रिया का संचालन करता है। नेत्र ज्योति को बढ़ाना तथा दिव्य दृष्टि को बनाए रखना इसके मुख्य कार्य हैं। जब आलोचक पित्त कुपित होता है तो नेत्र सम्बन्धी दोष शरीर में आने लगते हैं यथा नज़र कमजोर होना, आंखों में काला मोतिया व सफेद मोतिया के दोष आना। इस पित्त को नियन्त्रित करने के लिये साधक को नीचे लिखी क्रियाओं का अभ्यास करना चाहियेः
Tuesday, March 07, 2017
साधक पित्त
यह पित्त हृदय में रहता है। बुद्धि को तेज करता है प्रतिभा का निर्माण करता है। उत्साह एवं आनन्द की अनुभूति करवाता है। आध्यात्मिक शक्ति देता है। सात्विक वृत्ति का निर्माण करता है। ईष्र्या, द्वेष व स्वार्थ की भावना को समाप्त करता है। साधक पित्त के कुपित होने पर स्नायु तन्त्र तथा मानसिक रोग होने लगते हैं जैसे किः-
Monday, March 06, 2017
रंजक पित्त
यह पित्त लीवर में बनता है और पित्ताशय में रहता है। रंजक पित्त का कार्य बड़ा ही अनूठा व रहस्यमयी है। हमारे शरीर में भोजन के पचने पर जो रस बनता है रंजक पित्त उसे शुद्ध करके उससे खून बनाने का कार्य करता है।
Sunday, March 05, 2017
पाचक पित्त
पाचक पित्तः-पाचक पित्त पंचअग्नियों (पाचक ग्रन्थियों) से निकलने वाले रसों का सम्मिश्रित रूप है। इसमें अग्नि तत्व की प्रधानता पायी जाती है। ये पाँच रस इस प्रकार हैः-
- लार ग्रन्थियों से बनने वाला लार रस।
- आमाशय में बनने वाला आमाशीय रस।
- अग्नाशय का स्त्राव।
- पित्ताशय से बनने वाला पित्त रस।
- आन्त्र रस।
पाचक पित्त पक्कवाशय और आमाशय के बीच रहता है। इसका मुख्य कार्य भोजन में मिलकर उसका शोषण करना है। यह भोजन को पचा कर पाचक रस व मल को अलग-अलग करता है।
यह पक्कवाशय में रहते हुए दूसरे पाचक रसों को शक्ति देता है। शरीर को गर्म रखना भी इसका मुख्य कार्य है। जब पाचक पित्त शरीर में कुपित होता है तो शरीर में नीचे लिखे रोग हो सकते हैः-
- जठराग्नि का मन्द होना
- दस्त लगना
- खूनी पेचिश
- कब्ज बनना
- मधुमेह
- मोटापा
- अम्लपित्त
- अल्सर
- शरीर में कैलस्ट्रोल का अधिक बनना
- हृदय रोग
पाचक पित्त को नियन्त्रण करने के लिए नीचे लिखी क्रियाओं का साधक का अभ्यास करना होगा। यदि शरीर में पाचक पित्त सम अवस्था मे बनता है तो हमारा पाचन सुदृढ़ रहता है। जब शरीर में पाचन और निष्कासन क्रियाएं ठीक होती हैं तो हम ऊपर दिए गए रोगों से बच सकते हैं। इस पित्त को सन्तुलित करने के लिए नीचे दी गई क्रियाएं सहायक होंगीः-
शुद्धि क्रियाएंः कुंजल, शंख प्रक्षालन (नोटः-हृदय रोगियों के लिए निषेध है)।
आसनः त्रिकोणासन, जानुशिरासन, कोणासन, सर्पासन, पादोतानासन,अर्धमत्स्येन्द्रासन, शवासन।
प्राणायामः अग्निसार, शीतली, चन्द्रभेदी, उड्डियान बन्ध व बाह्य कुम्भक का अभ्यास।
भोजनः सुपाच्य भोजन, सलाद, हरी सब्जियाँ तथा ताजे फलों का सेवन भी पाचक पित्त को सम अवस्था में रखने में सहायक है।
Saturday, March 04, 2017
पित्त के कुपित होने के कारण
- कड़वा, खट्टा, गर्म व जलन पैदा करने वाले भोजन का सेवन करना।
- तीक्ष्ण द्रव्यों का सेवन करना। तला हुआ व अधिक मिर्च, मसालेदार भोजन करना।
- अधिक परिश्रम करना। नशीले पदार्थों का सेवन करना। ज्यादा देर तक तेज धूप में रहना।
- अधिक नमक का सेवन करना।
सन्तुलित पित्त जहाँ शरीर को बल व बुद्धि देता है, वहीं यदि इसका सन्तुलन बिगड़ जाए तो यह बहुत घातक सिद्ध होता है। कुपित पित्त से हमारे शरीर में कई प्रकार के रोग आते हैं।
Friday, March 03, 2017
पित्त के कार्य
पित्त हमारे शरीर में निम्नलिखित कार्य करता हैः-
- भोजन को पचाना।
- नेत्र ज्योति।
- त्वचा को कान्तियुक्त बनाना।
- स्मृति तथा बुद्धि प्रदान करना।
- भूख प्यास की अनुभूति करना।
- मल को बाहर कर शरीर को निर्मल करना।
Thursday, March 02, 2017
पित्त की प्रकृति
पित्त प्रधान व्यक्ति के मुँह का स्वाद कड़वा, जीभ व आंखों का रंग लाल, शरीर गर्म, पेशाब का रंग पीला होता है। ऐसे व्यक्ति को क्रोध अधिक आता है। उसे पसीना भी अधिक आएगा। कई बार ऐसा देखा गया है कि पित्त प्रधान व्यक्ति के बाल कम आयु में ही सफेद होने लगते हैं।
Wednesday, March 01, 2017
पित्त | Bile
पित्त से हमारा अभिप्राय हमारे शरीर की गर्मी से है। शरीर को गर्मी देने वाला तत्व ही पित्त कहलाता है। पित्त शरीर का पोषण करता हैं यह शरीर को बल देने वाला है। लारग्रंथि, अमाशय, अग्नाशय, लीवर व छोटी आँत से निकलने वाला रस भोजन को पचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पित्त का शरीर में कितना महत्व है, इसे हम इस प्रकार समझ सकते हैं कि जब तक यह शरीर गर्म है
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