यह पित्त सम्पूर्ण शरीर की त्वचा में रहता है। भ्राजक पित्त हमारे शरीर में विभिन्न कार्य करता है जैसे कि त्वचा को कान्तिमान बनाना, शरीर को सौन्दर्य प्रदान करना, विटामिन डी को ग्रहण करना तथा वायुमण्डल में पाए जाने वाले रोगाणुओं से शरीर की रक्षा करना।
- त्वचा पर सफेद तथा लाल चकत्तों का दोष होना।
- चर्म रोग का होना।
- शरीर में फोड़ा, फुन्सी होना।
- एग्जिमा।
- त्वचा का फटना आदि।
भ्राजक पित्त को शरीर में सम अवस्था में रखने के लिए नीचे लिखी क्रियाएं करनी चाहिए।
शुद्धि क्रियाएंः कुंजल, नेति व शंख प्रक्षालन।
आसनः सूर्य नमस्कार, नौकासन, चक्रासन, हस्तपादोत्तानासन
प्राणायामः गहरे लम्बे श्वास, प्लाविनी, तालबद्ध व नाड़ी शोधन प्राणायाम तथा तीनों बन्धों का बाह्य व आन्तरिक कुम्भक के साथ अभ्यास करें।
नोटः हृदय रोगी के लिए कुम्भक निषेध है।
विशेष क्रियाः पूरे शरीर में तेल की मालिश करें। सर्दी के मौसम में सूर्य स्नान करें।