हिस्टीरिया (HYSTERIA) (गुल्म-रोग / गुल्यवायु) रोग `न्यूरोसिस´ की ही एक किस्म है इसलिए इसे दिमागी बीमारी कहते हैं। हिस्टीरिया का रोग ज़्यादातर स्त्रियों को होने वाला एक दिमागी रोग होता है। इसको स्त्रियों का मानसिक रोग भी कहा जाता है। यह रोग 15-20 साल की युवतियों को अधिक होता है। हिस्टीरिया रोग में स्त्रियों को मिर्गी के समान ही बेहोशी के दौरे आते हैं।
लक्षण
जब हिस्टीरिया होता है, तो इसमें रोगी अचेत अवस्था में पहुंच जाता है। हिस्टीरिया रोग में सिर्फ रोगी को बेहोशी के दौरे ही नहीं पड़ते बल्कि कभी-कभी दूसरे लक्षण भी सामने आते हैं जैसे - हिस्टीरिया का दौरा पड़ने पर कुछ समय के लिए देखना और सुनना बन्द हो जाना, मुंह से आवाज़ ना निकलना, हाथ-पैरों का कांपना, शरीर का कोई भी हिस्सा बिल्कुल सुन्न पड़ जाना जैसा लकवे मे होता है। इसमें रोगी विभिन्न प्रकार की कुचेष्टायें यानी अजीब कार्य करने लगता है।
हिस्टीरिया रोग के होने पर रोगी स्त्री का जी मिचलाने लगता है, सांस कभी धीरे और कभी तेज चलने लगती है तथा बेहोशी छा जाती है। पीड़ित स्त्री के हाथ-पैर अकड़ने लगते हैं और उसके चेहरे की आकृति बिगड़ने लगती है। इस रोग से पीड़ित स्त्री अपने दिमाग पर काबू नहीं रख पाती है और अचानक हंसने लगती है और अचानक ही रोने लगती है। वह बिना किसी कारण से चिल्लाने लगती है और कोई-कोई रोगी इसमें मौन या चुप भी पड़ा रहता है। इस रोग से पीड़ित स्त्रियां कुछ बड़बड़ाने लगती है और दूसरों को मारने-पीटने लगती है और कभी चीख के साथ ज़मीन पर गिर जाती है। कभी बैठे-बैठे बेहोश होकर गिर पड़ती है। रोगी स्त्री को ऐसा लगता है कि वो कितनी ताकतवर है लेकिन दूसरे ही पल ऐसा महसूस होता है कि उसके शरीर में जान ही नहीं है। उसको परेशान करने वाली डकारें और हिचकी शुरू हो जाती है, आवाज़ में ख़राबी पैदा हो जाती है, पेशाब बन्द हो जाता है।
इस रोग में पूरी तरह से बेहोश नहीं होती है। बेहोशी की हालत समाप्त हो जाने पर स्त्री को खुलकर पेशाब आता है। इस रोग की उत्पत्ति से पूर्व या आरम्भ में हृदय में पीड़ा, जंभाई, बेचैनी आदि लक्षण भी होते हैं। इस रोग से पीड़ित स्त्री को सांस लेने में कठिनाई, सिर, पैर, पेट और छाती में दर्द, गले में कुछ फंस जाने का आभास, शरीर को छूने मात्र से ही दर्द महसूस होता है, आलसी स्वभाव, मेहनत करने में बिल्कुल भी मन ना करना, रात में बिना बात के जागना, सुबह देर तक सोते रहना, भ्रम होना, पेट में गोला सा उठकर गले तक जाना, दम घुटना, थकावट, गर्दन का अकड़ना, पेट में अफारा होना, डकारों का अधिक आना और हृदय की धड़कन बढ़ जाना, साथ ही लकवा और अंधापन हो जाना आदि हिस्टीरिया के लक्षण हैं।
▶इस रोग से पीड़ित स्त्री को प्रकाश की ओर देखने में परेशानी होने लगती है।
▶जब स्त्री को इस रोग का दौरा पड़ता है तो उसका गला सूखने लगता है और वह बेहोश हो जाती है।