- कड़वा, खट्टा, गर्म व जलन पैदा करने वाले भोजन का सेवन करना।
- तीक्ष्ण द्रव्यों का सेवन करना। तला हुआ व अधिक मिर्च, मसालेदार भोजन करना।
- अधिक परिश्रम करना। नशीले पदार्थों का सेवन करना। ज्यादा देर तक तेज धूप में रहना।
- अधिक नमक का सेवन करना।
सन्तुलित पित्त जहाँ शरीर को बल व बुद्धि देता है, वहीं यदि इसका सन्तुलन बिगड़ जाए तो यह बहुत घातक सिद्ध होता है। कुपित पित्त से हमारे शरीर में कई प्रकार के रोग आते हैं।