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Wednesday, March 08, 2017

आलोचक पित्त


यह पित्त आंखों में रहता है। देखने की क्रिया का संचालन करता है। नेत्र ज्योति को बढ़ाना तथा दिव्य दृष्टि को बनाए रखना इसके मुख्य कार्य हैं। जब आलोचक पित्त कुपित होता है तो नेत्र सम्बन्धी दोष शरीर में आने लगते हैं यथा नज़र कमजोर होना, आंखों में काला मोतिया व सफेद मोतिया के दोष आना। इस पित्त को नियन्त्रित करने के लिये साधक को नीचे लिखी क्रियाओं का अभ्यास करना चाहियेः

शुद्धि क्रियाएंः आई वाश कप से प्रतिदिन आंखें साफ करें। नेत्रधोति का अभ्यास करें। मुँह में पानी भरकर आँखों में शुद्ध जल के छींटे लगाएं। दोनो आई वाश कपों में पानी भरें, तत्पश्चात् आई वाश कप में आंखों को डुबो कर आंख की पुतलियों को तीन-चार बार ऊपर-नीचे, दाएं-बाएं व वृत्ताकार दिशा में घुमाएं। इसके लिए शुद्ध जल या त्रिफले के पानी का प्रयोग कर सकते हैं। 

आसनः कोणासन, उष्ट्रासन, भुजंगासन, धनुर व मत्स्यासन, ग्रीवा चालन, शवासन तथा नेत्र सुरक्षा क्रियाएं। 

प्राणायामः गहरे लम्बे श्वास, अनुलोम-विलोम, भ्रामरी, मूर्छा प्राणायाम। 

ध्यानः प्रतिदिन 10 मिनट ध्यान में बैठें। 

भोजन हरी व पत्तेदार सब्जियों का सेवन अधिक करें।